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क्या करें जब कोई झूठी एफआईआर दर्ज करवा दें




कभी कभी किसी व्यक्ति द्वारा किसी निर्दोष व्यक्ति पर झूठा आरोप लगाया जाता है | भारत के कानून में इस चीज को लेकर कई व्यवस्थाएं की गयी है | आइए पहले देखते है एफ आय आर क्या है?


एफ आय आर:


एफ आय आर मतलब फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट मतलब एक ऐसा दस्तावेज जो किसी अपराध की पहली सूचना होता है | जब भी कोई अपराध घटित होता है तब पुलिस अधिकारी को अपराध का संद्यान होने के बाद उसकी एफ आय आर दर्ज करने का अधिकार है |


दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १५४ के अंतर्गत एफ आय आर दर्ज की जाती है | इसमें अलग मोड़ तब आता है जब यह एफ आय आर किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ किया जाता है | इस केस में किसी शिकायतकर्ता द्वारा झूठी एफ आय आर दर्ज कर पुलिस से मिलीभगत कर किसी व्यक्ति को फसाया जाता है |


जब भी किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होती है तब आरोपी पर अनुसन्धान के बाद मुकदमा चलाया जाता है | लेकिन कभी किसी निर्दोष व्यक्ति पर बेवजह एफआईआर और आगे मुकदमा चलाया जा रहा है तो यह समाज के लिए खतरनाक है | भारत का कानून इतना मजबूत है की यदि कोई पुलिस अधिकारी किसी शिकायतकर्ता के साथ मिलीभगत कर किसी व्यक्ति के विरुद्ध झूठी एफआईआर दर्ज करता है तो उस व्यक्ति के पास यह अधिकार होता है की वह न्यायलय में जाकर उस एफआईआर को रद्द करवा दे |


एफआईआर रद्द कैसे करते है?


दंड प्रक्रिया संहिता, १९७३; धारा ४८२


यह धारा उच्च न्यायालय को एफआईआर रद्द करने की शक्तिया प्रदान करती है |





एफआईआर रद्द करने के लिए आधार:

झूठे तथ्य:- इस आधार के अंतर्गत यदि किसी एफआईआर के तथ्य देखने से ही झूठे साबित हो रहे हैं तथा उसे एफआईआर को देखकर यह प्रतीत हो रहा है कि झूठी एफआईआर करवाई गई है तथा पुलिस और शिकायतकर्ता की मिलीभगत से सी है एफआईआर की गई है तब उच्च न्यायालय के पास यह शक्ति है कि एफआईआर को रद्द कर दे।


झूठे आधार:- यदि किसी एफआईआर को दर्ज करने हेतु जो आधार लिए गए हैं वह स्पष्ट रूप से झूठ है दिख रहे हैं तथा उनसे संबंधित सबूतों को उस व्यक्ति द्वारा न्यायालय में पेश किया गया है जिस पर एफआईआर दर्ज की गई है तब उच्च न्यायालय ऐसी एफआईआर को भी रद्द कर सकती है।


यदि किसी व्यक्ति पर इस प्रकार से झूठी शिकायत कर एफआईआर दर्ज करवाई गई है तब उस व्यक्ति द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 का सहारा लिया जा सकता है। इस धारा के अंतर्गत उच्च न्यायालय के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर राहत पाई जा सकती है। दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत धारा को दिए जाने का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार से कानून के विरुद्ध किए जाने वाले कार्य को रोकना है। पुलिस का समाज में भय होता है तथा पुलिस निष्पक्ष रूप से कार्य करें तो यह समाज के लिए हितकर है परंतु यदि पुलिस थोड़े से भी भ्रष्ट चले और किसी व्यक्ति के विरुद्ध की गई झूठी शिकायत पर ही मुकदमा दर्ज कर दे तब उसकी निगरानी करने के लिए उच्च न्यायालय को यह शक्ति दी गई है।


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